Navel Meaning In Hindi: नाभि क्या है? अर्थ, परिभाषा, स्वास्थ्य और शरीर

(मुल प्रस्तावना)

नाभि का हिंदी में अर्थ समझना न केवल भाषा सीखने वालों के लिए आवश्यक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और शरीर रचना विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह लेख “हिंदी में अर्थ” श्रेणी का हिस्सा है, जो नाभि के विभिन्न अर्थों, महत्व, सांस्कृतिक संदर्भ, शारीरिक पहलुओं, और अभिव्यक्तियों का पता लगाएगा। हम नाभि से जुड़े मुहावरों, कहावतों, और प्रतीकात्मक अर्थों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे, जिससे आपको इस शब्द की गहरी समझ मिलेगी। अंत में, आप नाभि के बारे में सभी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।

नाभि का हिंदी में अर्थ: परिभाषा और मूल बातें

नाभि का हिंदी में अर्थ शरीर का वह मध्य भाग है जहाँ गर्भनाल जुड़ी होती है, और यह जीवन की उत्पत्ति का प्रतीक है। यह पेट पर एक निशान होता है जो जन्म के बाद गर्भनाल के कटने से बनता है। गर्भनाल माँ और बच्चे को जोड़ती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान बच्चे को पोषण मिलता है।

नाभि को कई संस्कृतियों में महत्वपूर्ण माना जाता है, और इसे सौंदर्य, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक कारणों से ध्यान में रखा जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, नाभि में कोई विशेष कार्य नहीं होता है, लेकिन आयुर्वेद जैसे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसे शरीर का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। नाभि शरीर के मध्य में स्थित होती है, इसलिए इसे संतुलन और स्थिरता का प्रतीक भी माना जाता है।

नाभि का हिंदी में अर्थ: परिभाषा और मूल बातें

“नाभि” शब्द की उत्पत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ

नाभि शब्द की उत्पत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ को समझने के लिए, हमें भाषा विज्ञान और प्राचीन सभ्यताओं की गहराई में जाना होगा, क्योंकि navel meaning in hindi केवल एक शारीरिक अंग का वर्णन नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विचारों से भी जुड़ा है।

संस्कृत भाषा, जो कई भारतीय भाषाओं की जननी है, में नाभि शब्द का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि यह शब्द ‘नभ’ धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है ‘केंद्र’ या ‘मध्य’। इस प्रकार, नाभि को शरीर का केंद्र माना जाता है। ऐतिहासिक ग्रंथों और वेदों में भी नाभि का उल्लेख मिलता है, जहाँ इसे जीवन और सृजन के स्रोत के रूप में दर्शाया गया है।

प्राचीन सभ्यताओं में, नाभि को उर्वरता और जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता था। मिस्र और सिंधु घाटी जैसी सभ्यताओं में पाई गई कलाकृतियों में नाभि के चित्रण मिलते हैं, जो इसके महत्व को दर्शाते हैं। भारत में, नाभि को देवी लक्ष्मी का निवास माना जाता है, जो धन और समृद्धि की प्रतीक हैं। यही कारण है कि कई धार्मिक अनुष्ठानों में नाभि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, योग और आयुर्वेद में भी नाभि को ऊर्जा केंद्र के रूप में माना जाता है, जिसे ‘मणिपुर चक्र’ कहा जाता है। यह चक्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस प्रकार, नाभि शब्द की उत्पत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ न केवल भाषा विज्ञान से जुड़ा है, बल्कि यह प्राचीन सभ्यताओं के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विश्वासों को भी दर्शाता है।

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नाभि के विभिन्न हिंदी समानार्थी शब्द और उनके अर्थ

नाभि को हिंदी में कई समानार्थी शब्दों से जाना जाता है, जो न केवल इसके विभिन्न अर्थों को दर्शाते हैं बल्कि भारतीय संस्कृति में इसके महत्व को भी उजागर करते हैं। नाभि का अर्थ हिंदी में शरीर का वह मध्य भाग है जहाँ गर्भनाल जुड़ा होता है, और इसे जीवन के स्रोत के रूप में देखा जाता है।

गर्भनाल एक महत्वपूर्ण समानार्थी शब्द है जो गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे के बीच संबंध को दर्शाता है। गर्भनाल शिशु को पोषण और ऑक्सीजन पहुँचाने का कार्य करती है, जो उसके विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह नाभि के जन्म से पहले के महत्व को रेखांकित करता है, जहाँ से जीवन की शुरुआत होती है।

टुंडी एक और हिंदी समानार्थी शब्द है जिसका उपयोग नाभि के लिए किया जाता है। यह शब्द आमतौर पर बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल होता है और इसका अर्थ पेट का वह भाग है जहाँ नाभि स्थित होती है। टुंडी शब्द का प्रयोग अक्सर बच्चों के साथ बातचीत में किया जाता है।

कुंडी शब्द का प्रयोग भी कभी-कभी नाभि के संदर्भ में किया जाता है, हालांकि यह शब्द अधिक व्यापक रूप से किसी छेद या छिद्र के लिए उपयोग किया जाता है। इस संदर्भ में, यह नाभि के आकार और संरचना को दर्शाता है, जो एक छोटा सा गड्ढा या निशान होता है।

नाभि के विभिन्न हिंदी समानार्थी शब्द और उनके अर्थ

नाभि के प्रतीकात्मक अर्थ और सांस्कृतिक महत्व

नाभि का प्रतीकात्मक अर्थ और सांस्कृतिक महत्व, भारतीय संस्कृति में विशेष रूप से गहरा है, जहाँ इसे जीवन के स्रोत और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के केंद्र के रूप में देखा जाता है, जिससे ‘navel meaning in hindi’ की व्यापकता स्पष्ट होती है। नाभि केवल एक शारीरिक निशान नहीं है; यह माँ और बच्चे के बीच पहले संबंध का प्रतीक है, जो पोषण और जीवन शक्ति का प्रतीक है।

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नाभि को विभिन्न संस्कृतियों में उर्वरता, सृजन और ब्रह्मांडीय जुड़ाव के प्रतीक के रूप में सम्मानित किया जाता है।

  • हिंदू धर्म में, भगवान विष्णु की नाभि से कमल निकलता है, जिस पर ब्रह्मा जी विराजमान होते हैं, जो सृष्टि की शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता है। यह नाभि को दिव्य उत्पत्ति का प्रतीक बनाता है।
  • कई प्राचीन सभ्यताओं में, नाभि को पृथ्वी के केंद्र या ‘दुनिया की नाभि‘ के रूप में माना जाता था, जो आध्यात्मिक और भौगोलिक दोनों तरह से एक केंद्रीय बिंदु का प्रतिनिधित्व करता था।
  • कुछ संस्कृतियों में, नाभि-दर्शन (नाभि को देखना) को शुभ माना जाता है और इसे सुंदरता और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है।

नाभि का सांस्कृतिक महत्व विभिन्न कला रूपों, जैसे कि मूर्तिकला, चित्रकला और साहित्य में भी स्पष्ट है।

  • भारतीय शास्त्रीय नृत्य, जैसे भरतनाट्यम और ओडिसी में, नाभि का प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो स्त्रीत्व और कामुकता का प्रतीक है।
  • कई प्राचीन मूर्तियों और चित्रों में, देवताओं और देवियों को नाभि के साथ दर्शाया गया है, जो उनकी दिव्यता और शक्ति का प्रतीक है।
  • लोककथाओं और कहानियों में, नाभि को अक्सर रहस्यमय शक्तियों और गुढ़ ज्ञान का स्रोत माना जाता है।

संक्षेप में, नाभि सिर्फ एक शारीरिक संरचना नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और अन्य संस्कृतियों में गहरे प्रतीकात्मक अर्थों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी है, जो इसे मानव अस्तित्व और ब्रह्मांडीय जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनाती है।

नाभि के प्रतीकात्मक अर्थ और सांस्कृतिक महत्व

नाभि के शारीरिक कार्य और स्वास्थ्य संबंधी पहलू

नाभि, जिसे आम भाषा में धुन्नी भी कहा जाता है, भले ही जन्म के बाद इसका कोई प्रत्यक्ष शारीरिक कार्य न हो, लेकिन गर्भनाल के माध्यम से यह जीवन के शुरुआती चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह लेख नाभि के शारीरिक कार्य और इससे जुड़े स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर प्रकाश डालता है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान इसकी भूमिका और वयस्क जीवन में संभावित स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं शामिल हैं।

गर्भनाल के माध्यम से, मां के गर्भ में पल रहे शिशु को पोषण और ऑक्सीजन मिलता है। यह गर्भनाल नाभि से जुड़ी होती है और भ्रूण के विकास के लिए आवश्यक पदार्थों का परिवहन करती है। जन्म के बाद गर्भनाल को काट दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप नाभि का निशान बनता है।

हालांकि नाभि का कोई प्रत्यक्ष शारीरिक कार्य नहीं होता है, लेकिन यह पेट की मांसपेशियों के मध्य भाग में स्थित होती है और कुछ व्यक्तियों में यह क्षेत्र हर्निया के लिए संवेदनशील हो सकता है। नाभि हर्निया तब होता है जब पेट की दीवार में कमजोरी के कारण आंत का एक हिस्सा नाभि के माध्यम से बाहर निकल जाता है। इसके अतिरिक्त, नाभि छिद्रण (नाभि में छेद) कराने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए उचित देखभाल और स्वच्छता महत्वपूर्ण है। कुछ संस्कृतियों में, नाभि को शरीर का एक ऊर्जा केंद्र माना जाता है, लेकिन इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। नाभि की साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इसमें गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, जिससे दुर्गंध और संक्रमण हो सकता है।

नाभि के शारीरिक कार्य और स्वास्थ्य संबंधी पहलू

नाभि के विभिन्न प्रकार: आकार, रूप और विविधताएं

नाभि के विभिन्न प्रकार में आकार, रूप और गहराई सहित कई भिन्नताएं शामिल हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति को अद्वितीय बनाती हैं और navel meaning in hindi को समझने में मदद करती हैं। मानव शरीर की यह छोटी सी विशेषता न केवल शारीरिक भिन्नता का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे जन्म और प्रारंभिक विकास की याद भी दिलाती है।

नाभि के आकार और प्रकार में व्यापक विविधता पाई जाती है, जिसका निर्धारण आनुवंशिक कारकों और गर्भनाल के कटने के तरीके से होता है।

  • बाहरी नाभि (Outie): यह नाभि का वह प्रकार है जिसमें नाभि का उभरा हुआ हिस्सा पेट की सतह से बाहर की ओर निकला हुआ होता है। ऐसा तब होता है जब गर्भनाल के कटने के बाद पेट की दीवार पूरी तरह से अंदर की ओर नहीं मुड़ती है।
  • आंतरिक नाभि (Innie): यह नाभि का सबसे आम प्रकार है, जिसमें नाभि पेट की सतह के अंदर की ओर धँसी हुई होती है। यह आमतौर पर गर्भनाल के कटने के बाद पेट की दीवार के सामान्य रूप से अंदर की ओर मुड़ने के कारण होता है।
  • अंडाकार नाभि: इस प्रकार की नाभि का आकार अंडाकार होता है और यह लंबवत या क्षैतिज रूप से फैली हुई हो सकती है।
  • ऊर्ध्वाधर नाभि: यह नाभि लंबवत रूप से लंबी होती है और पेट पर एक रेखा की तरह दिखाई देती है।
  • क्षैतिज नाभि: इस प्रकार की नाभि क्षैतिज रूप से फैली हुई होती है और पेट पर एक चौड़ी रेखा की तरह दिखाई देती है।
  • गोल नाभि: यह नाभि गोल आकार की होती है और यह आमतौर पर छोटी और गहरी होती है।
  • टी-आकार की नाभि: इस प्रकार की नाभि का आकार ‘टी’ अक्षर जैसा होता है और यह दुर्लभ होती है।
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इसके अतिरिक्त, नाभि की गहराई और आसपास की त्वचा की बनावट में भी अंतर हो सकता है। कुछ लोगों की नाभि गहरी और संकरी होती है, जबकि कुछ की नाभि उथली और चौड़ी होती है। नाभि के आसपास की त्वचा चिकनी, झुर्रीदार या निशान वाली हो सकती है। ये सभी विविधताएं नाभि को एक अद्वितीय शारीरिक विशेषता बनाती हैं। नाभि के प्रकारों की यह विविधता ना केवल शारीरिक, बल्कि सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

नाभि के विभिन्न प्रकार: आकार, रूप और विविधताएं

नाभि को लेकर प्रचलित मिथक, अंधविश्वास और गलत धारणाएं

नाभि को लेकर प्रचलित मिथक, अंधविश्वास और गलत धारणाएं भारतीय संस्कृति और समाज में सदियों से व्याप्त हैं, जबकि navel meaning in hindi के सही अर्थ और वैज्ञानिक तथ्यों से लोग अनजान हैं। इन भ्रांतियों के कारण, कई लोग नाभि की उचित देखभाल नहीं करते या अनावश्यक चिंता करते हैं।

  • मिथक 1: नाभि में तेल डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है: यह एक आम धारणा है कि नाभि में तेल लगाने से आंखों की रोशनी तेज होती है। हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। आंखों की रोशनी आनुवंशिकी, पोषण और समग्र स्वास्थ्य जैसे कारकों पर निर्भर करती है। नाभि में तेल लगाने से त्वचा को नमी मिल सकती है, लेकिन इसका आंखों की रोशनी पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता।

  • मिथक 2: नाभि शरीर का केंद्र है और सभी बीमारियों का इलाज यहाँ से किया जा सकता है: कुछ लोगों का मानना है कि नाभि शरीर का केंद्र है और नाभि चिकित्सा से सभी बीमारियों का इलाज संभव है। जबकि नाभि भ्रूण के विकास के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, यह शरीर का केंद्र नहीं है और सभी बीमारियों का इलाज इससे नहीं किया जा सकता। गंभीर बीमारियों के लिए हमेशा चिकित्सा पेशेवर से सलाह लेनी चाहिए।

  • अंधविश्वास 1: नाभि के आकार से भविष्य बताया जा सकता है: कुछ संस्कृतियों में, नाभि के आकार को भविष्य बताने का एक तरीका माना जाता है। उदाहरण के लिए, एक उभरी हुई नाभि को दुर्भाग्यपूर्ण माना जा सकता है, जबकि एक गहरी नाभि को सौभाग्यशाली माना जा सकता है। हालांकि, नाभि का आकार केवल एक शारीरिक विशेषता है और इसका भविष्य से कोई संबंध नहीं है।

  • गलत धारणा 1: नाभि को साफ करने की आवश्यकता नहीं होती: कुछ लोगों का मानना है कि नाभि को साफ करने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह शरीर का एक छिपा हुआ हिस्सा है। हालांकि, नाभि में गंदगी, पसीना और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है। इसलिए, नाभि को नियमित रूप से साफ करना महत्वपूर्ण है।

  • गलत धारणा 2: नाभि छेदने (piercing) से स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं: नाभि छेदने से संक्रमण और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन यदि इसे सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से किया जाए, तो जोखिम कम होते हैं। हमेशा एक प्रतिष्ठित पेशेवर से नाभि छेद करवाएं और उचित देखभाल निर्देशों का पालन करें।

इन मिथकों, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं से दूर रहना और नाभि की उचित देखभाल करना महत्वपूर्ण है। सही जानकारी और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।

नाभि से जुड़े मुहावरे और लोकोक्तियाँ (उदाहरण और स्पष्टीकरण)

नाभि केवल शरीर का एक भाग नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और भाषा में कई मुहावरों और लोकोक्तियों का भी हिस्सा है। ये मुहावरे और लोकोक्तियाँ नाभि के महत्व और इसके प्रतीकात्मक अर्थों को दर्शाते हैं, जो अक्सर गहरे जीवन दर्शन और अनुभवों को व्यक्त करते हैं। आइए, कुछ ऐसे ही मुहावरों और लोकोक्तियों के बारे में विस्तार से जानते हैं जो navel meaning in hindi को और भी स्पष्ट करते हैं।

यहां कुछ प्रमुख मुहावरे और लोकोक्तियाँ दी गई हैं, जिनमें नाभि का प्रयोग किया गया है:

  • नाभि टटोलना: यह मुहावरा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो हर काम में अपनी ही सोच और राय को सही मानता है। ऐसे लोग दूसरों की सलाह या मार्गदर्शन को महत्व नहीं देते और अपनी ही धुन में लगे रहते हैं। उदाहरण के लिए, “वह तो हमेशा अपनी नाभि टटोलता रहता है, किसी की सुनता ही नहीं।”

  • अपनी नाभि में अमृत समझना: इस लोकोक्ति का अर्थ है कि कोई व्यक्ति अपने आप को बहुत बुद्धिमान और श्रेष्ठ समझता है। ऐसा व्यक्ति दूसरों को कम आंकता है और अपनी क्षमताओं पर अत्यधिक गर्व करता है। उदाहरण के लिए, “उसे लगता है कि वह अपनी नाभि में अमृत समझता है, जबकि सच्चाई कुछ और ही है।”

  • नाभि से संबंध जोड़ना: यह मुहावरा गहरे और अटूट रिश्तों को दर्शाता है। नाभि माँ और बच्चे के बीच एक ऐसा संबंध स्थापित करती है जो जीवन भर के लिए होता है। इस मुहावरे का उपयोग ऐसे संबंधों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है जो बहुत मजबूत और महत्वपूर्ण होते हैं।

  • पेट में नाभि होना: यह कहावत उस स्थिति को दर्शाती है जब कोई बात या रहस्य भीतर ही छिपा रह जाता है। जिस प्रकार नाभि पेट के अंदर होती है और दिखाई नहीं देती, उसी प्रकार कोई गुप्त बात भी छिपी रहती है। उदाहरण के लिए, “उसने अपने पेट में नाभि की तरह यह बात छुपा रखी थी, किसी को पता नहीं चलने दिया।”

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ये मुहावरे और लोकोक्तियाँ नाभि के सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व को दर्शाते हैं। ये न केवल भाषा को समृद्ध करते हैं, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में भी मदद करते हैं। इनका उपयोग करके हम अपनी भावनाओं और विचारों को अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।

नाभि के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नाभि को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं, खासकर नाभि का हिंदी में अर्थ और इसके महत्व को लेकर। यहां हम कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) के माध्यम से नाभि से जुड़ी जानकारियों को स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे।

  • प्रश्न: नाभि क्या है और यह शरीर में कहाँ स्थित होती है?

    उत्तर: नाभि, जिसे अंग्रेजी में Navel या Belly Button भी कहा जाता है, पेट के मध्य में स्थित एक निशान है। यह वह स्थान है जहाँ जन्म के बाद गर्भनाल को काटा जाता है। गर्भनाल माँ और बच्चे को गर्भावस्था के दौरान जोड़ती है, जिससे बच्चे को पोषण मिलता है।

  • प्रश्न: क्या नाभि शरीर का कोई महत्वपूर्ण अंग है?

    उत्तर: जन्म के बाद, नाभि का प्रत्यक्ष शारीरिक कार्य नहीं होता है। गर्भावस्था के दौरान यह महत्वपूर्ण थी, लेकिन बाद में यह सिर्फ एक निशान के रूप में रह जाती है। हालांकि, कुछ योगिक परंपराओं में इसे शरीर का ऊर्जा केंद्र माना जाता है।

  • प्रश्न: नाभि कितने प्रकार की होती है?

    उत्तर: नाभि के आकार और रूप में विविधता पाई जाती है। कुछ लोगों की नाभि अंदर की ओर धँसी हुई होती है (innie), जबकि कुछ की बाहर की ओर उभरी हुई (outie)। यह गर्भनाल काटने के बाद बनने वाले निशान पर निर्भर करता है।

  • प्रश्न: नाभि की सफाई कैसे करनी चाहिए?

    उत्तर: नाभि की नियमित सफाई महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। इसे साफ करने के लिए आप एक नरम कपड़े को गुनगुने पानी और हल्के साबुन से गीला करके धीरे से साफ कर सकते हैं।

  • प्रश्न: क्या नाभि में तेल लगाने से कोई फायदा होता है?

    उत्तर: आयुर्वेद में नाभि में तेल लगाने के कई फायदे बताए गए हैं, जैसे त्वचा को नमी देना और पाचन को बेहतर बनाना। हालांकि, इस पर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन कुछ लोग इसे लाभकारी मानते हैं।

  • प्रश्न: नाभि से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं क्या हो सकती हैं?

    उत्तर: नाभि में संक्रमण, दर्द या डिस्चार्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि आपको कोई असामान्य लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

Last Updated on 14/12/2025 by Emma Collins

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