पेसमेकर का हिंदी अर्थ जानने की जिज्ञासा अक्सर उन लोगों में होती है जिन्हें या जिनके परिजनों को हृदय से संबंधित कोई समस्या है। सरल शब्दों में, पेसमेकर का हिंदी अर्थ “गति नियंत्रक” या “हृदय गति नियामक” होता है। यह एक छोटा, बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसे शरीर के अंदर प्रत्यारोपित किया जाता है ताकि असामान्य रूप से धीमी हृदय गति को नियंत्रित किया जा सके। यह शब्द दो अंग्रेजी शब्दों ‘पेस’ (गति) और ‘मेकर’ (बनाने वाला) से मिलकर बना है, जिसका सीधा संबंध हृदय की धड़कन की गति को बनाए रखने से है।
पेसमेकर क्या है? इसकी परिभाषा और कार्यप्रणाली

पेसमेकर एक चिकित्सा उपकरण है जो हृदय की विद्युत प्रणाली की निगरानी करता है और जब यह पाता है कि हृदय की धड़कन बहुत धीमी है, अनियमित है, या रुक गई है, तो यह हृदय की मांसपेशियों को विद्युत संकेत भेजकर सामान्य गति से धड़कने के लिए प्रेरित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य हृदय गति को एक सुरक्षित न्यूनतम स्तर पर बनाए रखना है, ताकि शरीर के विभिन्न अंगों को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
पेसमेकर के मुख्य घटक
एक पेसमेकर प्रणाली मुख्य रूप से दो भागों से मिलकर बनी होती है:
- जनरेटर: यह पेसमेकर का मुख्य भाग होता है जिसमें बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट लगे होते हैं। यह हृदय की गतिविधि पर नजर रखता है और जरूरत पड़ने पर विद्युत संकेत उत्पन्न करता है।
- लीड्स (तार): ये पतले, इन्सुलेटेड तार होते हैं जो जनरेटर से हृदय तक जुड़े होते हैं। इनका काम हृदय की गतिविधि की जानकारी जनरेटर तक पहुंचाना और जनरेटर द्वारा उत्पन्न विद्युत संकेतों को हृदय तक ले जाना है।
- सिंगल-चेंबर पेसमेकर: इस प्रकार के पेसमेकर में केवल एक लीड होती है जो या तो दाएं आलिंद या दाएं निलय में लगाई जाती है। यह उस एक कक्ष की ही धड़कन को नियंत्रित करता है।
- ड्यूल-चेंबर पेसमेकर: इसमें दो लीड्स होती हैं – एक दाएं आलिंद में और दूसरी दाएं निलय में। यह दोनों कक्षों के बीच समन्वय बनाकर हृदय की धड़कन को अधिक प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित करता है।
- बायवेंट्रिकुलर पेसमेकर (बीवीपी): यह हृदय गति रुकने के कुछ रोगियों के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें तीन लीड्स होती हैं – दाएं आलिंद, दाएं निलय और बाएं निलय में। यह हृदय के दोनों निलयों को एक साथ सिकुड़ने में मदद करता है।
- लेडलेस पेसमेकर: यह एक नई तकनीक है जिसमें पूरा उपकरण बहुत छोटा होता है और सीधे हृदय के अंदर प्रत्यारोपित किया जाता है। इसमें अलग से लीड्स की आवश्यकता नहीं होती।
- ब्रैडीकार्डिया: यह सबसे सामान्य कारण है, जिसमें हृदय की धड़कन सामान्य से बहुत धीमी हो जाती है। इसके कारण चक्कर आना, थकान, सांस फूलना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- हार्ट ब्लॉक: इसमें हृदय के विद्युत संकेतों का प्रवाह आलिंद से निलय तक अवरुद्ध हो जाता है, जिससे निलय की धड़कन बहुत धीमी हो सकती है।
- साइनस नोड डिसफंक्शन: हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर सही ढंग से काम नहीं करता, जिससे धड़कन अनियमित या बहुत धीमी हो जाती है।
- एट्रियल फिब्रिलेशन के साथ ब्रैडीकार्डिया: कुछ मामलों में, एट्रियल फिब्रिलेशन के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाएं हृदय गति को बहुत अधिक धीमा कर सकती हैं, जिसकी क्षतिपूर्ति के लिए पेसमेकर की आवश्यकता होती है।
- हार्ट फेल्योर: कुछ विशेष प्रकार के हार्ट फेल्योर में, बायवेंट्रिकुलर पेसमेकर हृदय के पंपिंग फंक्शन में सुधार करने के लिए लगाया जाता है, जिसे कार्डियक रिसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी कहते हैं।
- सबसे पहले, कंधे के पास, आमतौर पर बाएं हाथ की तरफ, एक छोटा चीरा लगाया जाता है।
- लीड्स (तारों) को एक शिरा के माध्यम से हृदय तक पहुंचाया जाता है। एक्स-रे इमेजिंग की मदद से इन्हें सही स्थान पर रखा जाता है।
- लीड्स के दूसरे सिरे को पेसमेकर जनरेटर से जोड़ा जाता है।
- जनरेटर को चीरे के नीचे, त्वचा और मांसपेशियों के बीच बनाई गई एक छोटी जेब में रख दिया जाता है।
- अंत में चीरे को बंद करके टांके लगा दिए जाते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: सेल फोन को पेसमेकर वाले कान से कम से कम 15 सेंटीमीटर दूर रखकर बात करनी चाहिए। माइक्रोवेव ओवन और अन्य घरेलू उपकरण सामान्य रूप से इस्तेमाल किए जा सकते हैं, बशर्ते वे ठीक से काम कर रहे हों।
- सुरक्षा जांच: हवाई अड्डे की सुरक्षा जांच गेट से गुजरने से पेसमेकर को कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन धातु डिटेक्टर पेसमेकर को सक्रिय कर सकता है। इसलिए, सुरक्षा कर्मियों को पेसमेकर के बारे में पहले ही सूचित कर देना चाहिए।
- चिकित्सा प्रक्रियाएँ: एमआरआई स्कैन करवाने से पहले डॉक्टर को पेसमेकर के बारे में बताना जरूरी है, क्योंकि सभी पेसमेकर एमआरआई-सुरक्षित नहीं होते। डायथर्मी और रेडिएशन थेरेपी जैसी प्रक्रियाओं से भी बचना चाहिए।
- शारीरिक गतिविधि: तैराकी, टहलना, जॉगिंग जैसी सामान्य गतिविधियाँ की जा सकती हैं। हालांकि, संपर्क वाले खेल जैसे फुटबॉल या मार्शल आर्ट से बचना चाहिए क्योंकि इससे पेसमेकर वाले स्थान पर चोट लग सकती है।
पेसमेकर के प्रकार: कौन सा किसके लिए उपयुक्त?
रोगी की स्थिति के आधार पर अलग-अलग प्रकार के पेसमेकर प्रत्यारोपित किए जाते हैं। इनका वर्गीकरण उनमें लगी लीड्स (तारों) की संख्या और स्थान के आधार पर किया जाता है।
विभिन्न पेसमेकर प्रणालियाँ
| पेसमेकर प्रकार | लीड्स की संख्या | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| सिंगल-चेंबर | 1 | केवल आलिंद या निलय की समस्या |
| ड्यूल-चेंबर | 2 | आलिंद और निलय के बीच समन्वय की समस्या |
| बायवेंट्रिकुलर (बीवीपी) | 3 | हृदय गति रुकना (हार्ट फेल्योर) के कुछ मामले |
| लेडलेस | 0 | जटिलताओं के जोखिम को कम करने के लिए |
पेसमेकर लगाने की आवश्यकता कब होती है?

पेसमेकर प्रत्यारोपण एक गंभीर चिकित्सा प्रक्रिया है जो तब की जाती है जब हृदय अपनी स्वाभाविक गति से धड़कने में असमर्थ होता है। इसकी आवश्यकता का निर्णय कार्डियोलॉजिस्ट विभिन्न जांचों के बाद करते हैं।
मुख्य चिकित्सीय स्थितियाँ
पेसमेकर प्रत्यारोपण प्रक्रिया: क्या होता है ऑपरेशन के दौरान?
पेसमेकर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया आमतौर पर एक छोटी सर्जरी होती है जो लोकल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है। इसमें मरीज को पूरी तरह से सुलाने की आवश्यकता नहीं होती। पूरी प्रक्रिया में एक से दो घंटे का समय लग सकता है।
प्रक्रिया के चरण
प्रक्रिया के बाद, पेसमेकर को प्रोग्राम किया जाता है ताकि वह रोगी की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार काम करे। अस्पताल में एक रात रुकने के बाद अधिकांश रोगी घर जा सकते हैं।
पेसमेकर लगवाने के बाद की जीवनशैली और सावधानियाँ

पेसमेकर लगवाने के बाद सामान्य जीवन जीया जा सकता है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है। यह उपकरण आधुनिक तकनीक से लैस है, फिर भी कुछ विशेष परिस्थितियों में इसके कार्यप्रणाली में व्यवधान आ सकता है।
आवश्यक सावधानियाँ
पेसमेकर से जुड़े भ्रम और वास्तविकता
पेसमेकर को लेकर लोगों में कई तरह की गलतफहमियां हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है।
सामान्य भ्रम और सच्चाई
भ्रम: पेसमेकर लगवाने के बाद व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है।
वास्तविकता: यह बिल्कुल गलत है। पेसमेकर एक जीवनरक्षक उपकरण है जो हृदय गति को नियंत्रित करके जीवन की गुणवत्ता और अवधि दोनों को बेहतर बनाता है।
भ्रम: पेसमेकर बिजली के झटके देता है।
वास्तविकता: पेसमेकर सामान्य रूप से हल्के विद्युत संकेत भेजकर हृदय को धड़कने के लिए प्रेरित करता है, जिसे रोगी महसूस नहीं करता। केवल इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर-डिफिब्रिलेटर ही बड़े झटके दे सकता है, जो एक अलग उपकरण है।
भ्रम: पेसमेकर लगवाने के बाद सामान्य जीवन नहीं जी सकते।
वास्तविकता: अधिकांश रोगी पेसमेकर लगवाने के बाद पहले से अधिक सक्रिय और बेहतर जीवन जी पाते हैं, क्योंकि उनके लक्षण जैसे थकान और चक्कर आना कम हो जाते हैं।
पेसमेकर की बैटरी लाइफ और अनुवर्ती देखभाल

आधुनिक पेसमेकर की बैटरी आमतौर पर 5 से 15 साल तक चलती है। बैटरी की लंबी उम्र इस बात पर निर्भर करती है कि पेसमेकर को कितनी बार और कितनी शक्ति के साथ काम करना पड़ रहा है। बैटरी खत्म होने पर पूरे पेसमेकर को बदलने की आवश्यकता होती है, क्योंकि बैटरी उपकरण के अंदर सीलबंद होती है।
नियमित अनुवर्ती जांचें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन जांचों में, डॉक्टर एक विशेष प्रोग्रामर के माध्यम से पेसमेकर से वायरलेस तरीके से डेटा प्राप्त करते हैं। इससे बैटरी की स्थिति, हृदय गति का रिकॉर्ड और पेसमेकर के कार्यों की जानकारी मिलती है। आवश्यकता पड़ने पर पेसमेकर की सेटिंग्स को दूर से ही समायोजित किया जा सकता है।
पेसमेकर से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पेसमेकर का हिंदी में पूरा नाम क्या है?
पेसमेकर का हिंदी में कोई आधिकारिक संक्षिप्त रूप नहीं है। इसे हिंदी में “हृदय गति नियंत्रक” या “गति नियामक” कहा जाता है। चिकित्सा क्षेत्र में अंग्रेजी शब्द ‘पेसमेकर’ का ही प्रयोग सर्वाधिक होता है।
क्या पेसमेकर लगवाने के बाद ड्राइविंग कर सकते हैं?
यह रोगी की स्थिति और देश के नियमों पर निर्भर करता है। आमतौर पर, प्रक्रिया के बाद कुछ दिनों या हफ्तों के लिए ड्राइविंग से परहेज की सलाह दी जाती है। व्यावसायिक वाहन चलाने वालों के लिए नियम और सख्त हो सकते हैं। अपने कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह अवश्य लें।
पेसमेकर की कीमत कितनी होती है?
पेसमेकर की कीमत उसके प्रकार, ब्रांड, तकनीक और अस्पताल पर निर्भर करती है। भारत में, एक बुनियादी पेसमेकर सिस्टम की कीमत लगभग 50,000 से 2,00,000 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। बायवेंट्रिकुलर या एमआरआई-सुरक्षित पेसमेकर की कीमत अधिक होती है। इसमें सर्जरी और अस्पताल का खर्च अलग से जुड़ता है।
क्या पेसमेकर लगवाने के बाद मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं?
हां, कर सकते हैं, लेकिन कुछ सावधानियों के साथ। मोबाइल फोन को पेसमेकर वाले कंधे के विपरीत कान से लगाकर बात करनी चाहिए। फोन को शर्ट की जेब में या बेल्ट पर नहीं रखना चाहिए। ब्लूटूथ हेडसेट का इस्तेमाल सुरक्षित माना जाता है।
पेसमेकर लगा हो तो कौन सी जांचें नहीं करवानी चाहिए?
एमआरआई स्कैन करवाने से पहले डॉक्टर को सूचित करना जरूरी है। केवल एमआरआई-कंडीशनल पेसमेकर ही एमआरआई स्कैन में सुरक्षित होते हैं। इसके अलावा, डायथर्मी (गहरी ऊतक गर्मी चिकित्सा), शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (गुर्दे की पथरी तोड़ने की प्रक्रिया), और कुछ प्रकार की रेडिएशन थेरेपी से बचना चाहिए। एक्स-रे और सीटी स्कैन सामान्य रूप से सुरक्षित हैं।
निष्कर्ष

पेसमेकर का हिंदी अर्थ जानना केवल शब्दों की व्याख्या नहीं है, बल्कि इस जीवनरक्षक तकनीक की गहरी समझ हासिल करना है। यह एक ऐसा चमत्कारी उपकरण है जो लाखों लोगों को सामान्य, सक्रिय जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है। यदि आप या आपके कोई परिजन पेसमेकर प्रत्यारोपण पर विचार कर रहे हैं, तो एक योग्य हृदय रोग विशेषज्ञ से संपूर्ण परामर्श लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक पेसमेकर तकनीक सुरक्षित, विश्वसनीय और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है, जो हृदय को सही लय में धड़कने में मदद करके जीवन को गति प्रदान करती है।
Last Updated on 12/03/2026 by Emma Collins

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